देहरादून(हिल न्यूज़ लाइव): उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी, नैनीताल में आज से हिमालयी राज्यों के विकास और चुनौतियों को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इसमें हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ ही नेपाल और भूटान के प्रतिनिधि भी शामिल हुए है।
दो दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों के द्वारा हिमालयन राज्यों के शहरी क्षेत्र में होने वाले निर्माण को लेकर वैज्ञानिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया। उत्तराखंड प्रशासन अकादमी, नैनीताल के निदेशक बी पी पांडेय ने बताया कि सेमिनार में सभी प्रतिभागियों द्वारा एक ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। जिससे आने वाले समय में नए निर्माण से हिमालयन बेल्ट भी सुरक्षित रहेगी और भूस्खलन आदि का खतरा भी कम हो सकेगा।
शहरी क्षेत्रों के साथ ही पैरीअर्बन एरिया में समय की आवश्यकताओं के दृष्टिगत् बदलाव, स्वच्छता व्यवस्थाओं एवं पर्यटकों के बढते फूटफॉल के कारण आवश्यक ढाँचागत सुविधाओं तथा पार्किंग निर्माण आदि पर चर्चा की गयी। विगत 2 दशकों में उत्तराखण्ड के पर्यटन क्षेत्रों में पर्यटकों के बढ़ते दबाव एवं उसके पर्यावरणीय प्रभाव के अध्ययन की आवश्यकताओं पर बल दिया गया, साथ ही उत्तराखण्ड की परम्परागत वॉटर बॉडिज, जल स्त्रोत, नौले के अस्तित्व के संकट पर चिंता व्यक्त की गयी व प्रभावी मैकेनिजम बनाने पर बल दिया गया।
उत्तराखण्ड राज्य में केदारनाथ यात्रा में जिला प्रशासन द्वारा यात्रा मार्ग में प्रत्येक प्लास्टिक बॉटल्स हेतु जारी क्यू आर कोड अर्थात डी आर एस (डिजिटल डिपॉजिट रिफण्ड सिस्टम) कार्य योजना को साझा किया।



