देहरादून(हिल न्यूज़ लाइव): बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की प्रक्रिया से जुड़ा पहला चरण आज से शुरू हो गया है। पावन मुहूर्त पर नरेंद्रनगर राजमहल में श्री भगवान बदरी विशाल जी के श्रृंगार के लिए तिल का तेल परम्परागत रूप से सुहागन महिलाओं द्वारा पिरोया गया।
श्री बदरीनाथ धाम गाडू घड़ा तेल कलश के लिए आज नरेंद्र नगर स्थित राजमहल में महारानी राज्यलक्ष्मी शाह के साथ सुहागिन महिलाओं ने तिलों का तेल पिरोया। मनुजयेंद्र शाह और माला राज्यलक्ष्मी शाह, राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल की उपस्थिति में तेल पिरोने की रस्म पूरी की गई। इस मौके पर टिहरी की सांसद महारानी राज्य लक्ष्मी शाह ने भगवान बद्री विशाल से विश्वशांति की कामना की।
टिहरी राजपरिवार और बद्रीनाथ धाम की धार्मिक परम्पराए:
शंकराचार्य द्वारा आठवीं शताब्दी के मध्य में बद्रीनाथ स्थित नारद कुंड में फेंकी गई विष्णु रूप भगवान शालिग्राम की मूर्ति को पुनः बद्रीनाथ मंदिर में स्थापित किए जाने के साथ ही बदरीनाथ धाम के उत्तर स्थित चार धाम के रूप में मान्यता प्राप्त हुई, जहां की केरल के नंबूद्रीपाद ब्राह्मण को पुजारी के रूप में बतौर रावल नियुक्त किया गया, बहुत जल्द ही उत्तर के इस तीर्थ में अखिल भारतीय मान्यता प्राप्त कर ली और देश के कोने कोने से यात्रियों का यहां आना प्रारंभ हो गया।
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