आपदा की परिस्थितियों में क्विक रिस्पांस के लिए मॉक ड्रिल, प्रथम चरण में बागेश्वर, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग एवं नैनीताल शामिल .

देहरादून(हिल न्यूज़ लाइव): उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशन में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल के प्रथम चरण में बागेश्वर, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग एवं नैनीताल जनपदों में व्यापक स्तर पर बहु-स्थलीय मॉक अभ्यास आयोजित किए गए। इन माॅक ड्रिल के जरिये संभावित आपदा की परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया, विभागीय समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता तथा राहत एवं बचाव तंत्र की वास्तविक तैयारियों का आकलन किया गया। यह पहला अवसर रहा जब जनपदों द्वारा स्वयं अपने स्तर पर माॅक ड्रिल की गई ।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से सभी जनपदों में संचालित मॉक अभ्यासों की निरंतर निगरानी की गई। विभिन्न परिदृश्यों जैसे भूकम्प, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना, नदी में बाढ़, वनाग्नि एवं अन्य आपात स्थितियों के माध्यम से तैयारियों को परखा गया। मॉक अभ्यास के दौरान पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर सर्विस, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, राजस्व विभाग सहित अन्य आपातकालीन सेवाओं ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए प्रभावितों के सुरक्षित रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार, राहत वितरण की प्रक्रियाओं का अभ्यास किया।

इस अवसर पर सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस प्रकार के राज्य स्तरीय मॉक अभ्यास न केवल हमारी तैयारियों की वास्तविक स्थिति को सामने लाते हैं, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करते हैं। आपदा की स्थिति में गोल्डन ऑवर के दौरान त्वरित एवं संगठित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है और ऐसे अभ्यास उसी दिशा में हमारी क्षमता को निरंतर बेहतर बनाते हैं। साथ ही, इनसे प्राप्त अनुभवों के आधार पर कमियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जा सकता है, जिससे जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।

इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन श्री महावीर सिंह चौहान, वित्त नियंत्रक श्री अभिषेक कुमार आनंद, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक श्री शांतनु सरकार तथा यूएसडीएमए के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। 

जनपद बागेश्वर में विभिन्न स्थानों पर आयोजित मॉक अभ्यास के दौरान भूकम्प, भूस्खलन, आग एवं वन्यजीव हमले जैसी परिस्थितियों का यथार्थपरक प्रदर्शन किया गया। डिग्री कॉलेज क्षेत्र में भवन क्षति एवं मलबे में फंसे लोगों के रेस्क्यू, गरुड़ क्षेत्र में भूस्खलन, कांडा में आग लगने तथा गुलदार हमले के परिदृश्यों पर प्रभावी राहत-बचाव कार्य किए गए। जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे जी द्वारा जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से लगातार मॉनिटरिंग की गई। 

रुद्रप्रयाग जनपद में भूकम्प, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना एवं वनाग्नि जैसी घटनाओं पर आधारित मॉक ड्रिल आयोजित की गई। सिरोहबगड़, मुनकटिया, सोनप्रयाग क्षेत्रों में भूस्खलन, घोलतीर में सड़क दुर्घटना, अगस्त्यमुनि में भूकम्प तथा बुवाखाल क्षेत्र में वनाग्नि के परिदृश्यों पर विभिन्न विभागों द्वारा समन्वित कार्रवाई का अभ्यास किया गया।

जनपद पौड़ी में चार अलग-अलग स्थानों पर नदी के जलस्तर में वृद्धि, भूस्खलन, बस दुर्घटना एवं वनाग्नि के परिदृश्यों पर मॉक अभ्यास किया गया। कोटद्वार क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला गया, थलीसैंण में भूस्खलन के दौरान घायलों को एयरलिफ्ट किया गया, धुमाकोट क्षेत्र में बस दुर्घटना में फंसे लोगों का रेस्क्यू किया गया तथा बुवाखाल क्षेत्र में वनाग्नि पर नियंत्रण पाया गया। जिलाधिकारी श्रीमती स्वाति एस. भदौरिया के निर्देशन में कंट्रोल रूम से पूरी कार्यवाही की सघन निगरानी की गई ।

जनपद उत्तरकाशी में मनेरी भाली परियोजना-01 में बांध से रिसाव की स्थिति को दर्शाते हुए निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कार्यवाही का अभ्यास किया गया। सिलक्यारा क्षेत्र में सुरंग धंसने की स्थिति का परिदृश्य तैयार किया गया, जिसमें सुरंग के भीतर फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित किया गया। पाली गाड़ क्षेत्र में वाहन दुर्घटना का परिदृश्य प्रस्तुत किया गया तथा डुंडालगांव क्षेत्र में भूस्खलन की स्थिति को दर्शाते हुए मार्ग अवरुद्ध होने एवं बड़ी संख्या में वाहनों के फंसने का परिदृश्य तैयार किया गया।