देहरादून(हिल न्यूज़ लाइव): हिमालयी महाकुंभ यात्रा, एशिया की सबसे लंबी और कठिन पैदल यात्रा 'नंदा राजजात यात्रा' को लेकर वसंत पंचमी पर सिद्धपीठ नंदाधाम कुरूड़ में 'बड़ी नंदा जात' को लेकर तिथियों का ऐलान किया गया, जहां गौड़ पुजारियों एवं मंदिर समिति की मौजूदगी में दिन पट्टा निकाला गया, 2026 में ही 'बड़ी नंदा जात' की यात्रा निकाली जाएगी।
उत्तराखंड की आराध्य देवी मां नंदा देवी की आस्था और परंपरा से जुड़ी ऐतिहासिक 'बड़ी नंदा जात 2026' को लेकर नंदानगर स्थित सिद्धपीठ नंदाधाम कुरूड़ में दिन पट्टा निकाला गया जहां मां नंदा देवी के पश्वा अर्थात जिनमें देवी या देवता अवतरित होते हैं ने परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ बड़ी जात के शुभारंभ होने की इच्छा जाहिर की, इस दौरान मंदिर प्रांगण में विधि विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए, जिसमें काफी संख्या में श्रद्धालु भी पहुंचे हुए थे।
5 सितंबर से शुरू होगी बड़ी नंदा जात यात्रा, इस साल 'बड़ी नंदा जात' में कुल 26 पड़ाव निर्धारित किए गए हैं, 5 सितंबर 2026 को मां नंदा देवी की डोली सिद्धपीठ नंदाधाम कुरूड़ से यात्रा का शुभारंभ होगी।
20 सितंबर 2026 को बड़ी नंदा जात अपने अंतिम पड़ाव शिला समुद्र से आगे बढ़ते हुए होमकुंड पहुंचेगी, जहां विधि विधान से धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मां नंदा देवी को कैलाश के लिए विदा किया जाएगा।
आपको बता दें कि एशिया की सबसे लंबी 280 किमी की पैदल यात्रा है, इस हिमालयी महाकुंभ यात्रा में हजारों-लाखों की संख्या में श्रद्धालु प्रतिभाग करते हैं, इस यात्रा में गढ़वाल-कुमांऊ के श्रद्धालु छतोलियों के साथ यात्रा में भाग लेते हैं।
जबकि दूसरी ओर श्री नंदा देवी राजजात समिति नौटी ने 'नंदा राजजात यात्रा' को 2027 में कराने का निर्णय लिया है।

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